निर्देश - पहले निर्देश पढ़े |
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1) श्रीमद भागवत महापुराण वैदिक ग्रन्थ है | इसकी व्याख्या सही तभी हो सकती है जब आपने समग्रता से गीता , उपनिषद् का भी अध्ययन किया है |
2) श्रीमद भागवत महापुराण के अध्ययन / प्रशिक्षण हेतु गीता प्रेस की किताब खंड -1 और खंड -2 अपने पास रखे
3) रोज नियम से श्रीमद भागवत महापुराण का पाठ करे | श्लोक और उसमे दिए हिंदी अर्थ का | ये एक साधना रूप में करें | पहले 10 दिन रोज 10 श्लोक अर्थ सहित पढ़े | फिर आगे 10 दिन 20 श्लोक | इस प्रकार इसको बढ़ाये | इसको एक नियमित साधना रूप में करें |
4) इस लिंक पर संस्कृत का बेसिक कोर्स है उसको पूरा करें | निर्देश पहले पढ़े |
5) गुरूजी द्वारा श्रीमद भागवत महापुराण के ऊपर प्रवचन जो पुराने है वो भी सुने और लाइव क्लास में भी आये |
6) महात्म्य से शुरू होकर , प्रत्येक अध्याय के ऊपर quiz प्रश्न पूरा करना है कम से कम 95% स्कोर लाकर | अगर नहीं आया तो फिरसे अभ्यास करे |
7) भजन और स्तोत्र पाठ सिखने हेतु जो क्लास होता है लाइव उसमे सम्मिलित हो |
8) quiz पूरा करने के बाद हरेक अध्याय पर प्रवचन रिकॉर्ड करके अपलोड करें | अपलोड का लिंक दिया है | प्रवचन का स्क्रिप्ट तैयार मिलेगा | जैसा मिलेगा वैसा करें | quiz और प्रवचन निचे दिए गए प्रत्येक अध्याय के लिंक में मिलेगा | अगर लिंक में अपलोड नहीं हो रहा तो व्हाट्स एप्प कीजिये या फिर यू tube पर अपलोड कर लिंक भेजिए |
9) यू tube पर हारमोनियम या दुसरे वाद्य यंत्र सिखने के बहुत सारे विडियो है | उसको देखे और सिखने का प्रयत्न करे | नोट - निर्देश का अक्षरशः पालन अनिवार्य है |
श्रीमद भागवत महापुराण क्लास के सभी विडियो इस प्लेलिस्ट में है | सबको रोज नियम बनाकर सुने | जिसके पास समय है वो सुबह 7.15 बजे लाइव क्लास में आये | लाइव क्लास मंगलवार को सुबह 7.15 बजे होता है गूगल मीट पर |
।। श्रीहरिः ।।
विषय-सूची
प्रथम खण्ड
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य
२-भक्तिका दुःख दूर करनेके लिये नारदजीका उद्योग
३-भक्तिके कष्टकी निवृत्ति
४-गोकर्णोपाख्यान प्रारम्भ
५-धुन्धुकारीको प्रेतयोनिकी प्राप्ति और उससे उद्धार
६-सप्ताहयज्ञकी विधि
प्रथम स्कन्ध
१-श्रीसूतजीसे शौनकादि ऋषियोंका प्रश्न
२-भगवत्कथा और भगवद्भक्तिका माहात्म्य
३-भगवान्के अवतारोंका वर्णन
४-महर्षि व्यासका असंतोष
५-भगवान्के यश-कीर्तनकी महिमा और देवर्षि नारदजीका पूर्वचरित्र
६-नारदजीके पूर्वचरित्रका शेष भाग
७-अश्वत्थामाद्वारा द्रौपदीके पुत्रोंका मारा जाना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाका मानमर्दन
८- गर्भमें परीक्षित्की रक्षा, कुन्तीके द्वारा भगवान्की स्तुति और युधिष्ठिरका शोक
९-युधिष्ठिरादिका भीष्मजीके पास जाना और भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति करते हुए भीष्मजीका प्राणत्याग करना
१०-श्रीकृष्णका द्वारका-गमन
११-द्वारकामें श्रीकृष्णका राजोचित स्वागत
१२-परीक्षित्का जन्म
१३-विदुरजीके उपदेशसे धृतराष्ट्र और गान्धारीका वनमें जाना
१४-अपशकुन देखकर महाराज युधिष्ठिरका शंका करना और अर्जुनका द्वारकासे लौटना
१५-कृष्णविरहव्यथित पाण्डवोंका परीक्षित्को राज्य देकर स्वर्ग सिधारना
१६-परीक्षित्की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वीका संवाद
१७-महाराज परीक्षित्द्वारा कलियुगका दमन
१८-राजा परीक्षित्को शृंगी ऋषिका शाप
१९-परीक्षित्का अनशनव्रत और शुकदेवजीका आगमन
द्वितीय स्कन्ध
१-ध्यान-विधि और भगवान्के विराट्स्वरूपका वर्णन
२-भगवान्के स्थूल और सूक्ष्मरूपोंकी धारणा तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्तिका वर्णन
३-कामनाओंके अनुसार विभिन्न देवताओंकी उपासना तथा भगवद्भक्तिके प्राधान्यका निरूपण
४-राजाका सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजीका कथारम्भ
५-सृष्टि-वर्णन
६-विराट्स्वरूपकी विभूतियोंका वर्णन
७-भगवान्के लीलावतारोंकी कथा
८-राजा परीक्षित्के विविध प्रश्न
९-ब्रह्माजीका भगवद्धामदर्शन और भगवान्के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवतका उपदेश
१०-भागवतके दस लक्षण
तृतीय स्कन्ध
१-उद्धव और विदुरकी भेंट
२-उद्धवजीद्वारा भगवान्की बाललीलाओंका वर्णन
३-भगवान्के अन्य लीलाचरित्रोंका वर्णन
४-उद्धवजीसे विदा होकर विदुरजीका मैत्रेय ऋषिके पास जाना
५-विदुरजीका प्रश्न और मैत्रेयजीका सृष्टिक्रम वर्णन
६-विराट् शरीरकी उत्पत्ति
७-विदुरजीके प्रश्न
८- ब्रह्माजीकी उत्पत्ति
९-ब्रह्माजीद्वारा भगवान्की स्तुति
१०-दस प्रकारकी सृष्टिका वर्णन
११-मन्वन्तरादि कालविभागका वर्णन
१२-सृष्टिका विस्तार
१३-वाराह-अवतारकी कथा
१४-दितिका गर्भधारण
१५-जय-विजयको सनकादिका शाप
१६-जय-विजयका वैकुण्ठसे पतन
१७-हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षका जन्म तथा हिरण्याक्षकी दिग्विजय
१८-हिरण्याक्षके साथ वराहभगवान्का युद्ध
१९-हिरण्याक्ष-वध
२०-ब्रह्माजीकी रची हुई अनेक प्रकारकी सृष्टिका वर्णन
२१-कर्दमजीकी तपस्या और भगवान्का वरदान
२२-देवहूतिके साथ कर्दम प्रजापतिका विवाह
२३-कर्दम और देवहूतिका विहार
२४-श्रीकपिलदेवजीका जन्म
२५-देवहूतिका प्रश्न तथा भगवान् कपिलद्वारा भक्तियोगकी महिमाका वर्णन
२६-महदादि भिन्न-भिन्न तत्त्वोंकी उत्पत्तिका वर्णन
२७-प्रकृति-पुरुषके विवेकसे मोक्ष प्राप्तिका वर्णन
२८-अष्टांगयोगकी विधि
२९-भक्तिका मर्म और कालकी महिमा
३०-देह-गेहमें आसक्त पुरुषोंकी अधोगतिका वर्णन
३१-मनुष्ययोनिको प्राप्त हुए जीवकी गतिका वर्णन
३२-धूममार्ग और अर्चिरादि मार्गसे जानेवालोंकी गतिका और भक्तियोगकी उत्कृष्टताका वर्णन
३३-देवहूतिको तत्त्वज्ञान एवं मोक्षपदकी प्राप्ति
चतुर्थ स्कन्ध
१-स्वायम्भुव-मनुकी कन्याओंके वंशका वर्णन
२-भगवान् शिव और दक्ष प्रजापतिका मनोमालिन्य
३-सतीका पिताके यहाँ यज्ञोत्सवमें जानेके लिये आग्रह करना
४-सतीका अग्निप्रवेश
५-वीरभद्रकृत दक्षयज्ञविध्वंस और दक्षवध
६-ब्रह्मादि देवताओंका कैलास जाकर श्रीमहादेवजीको मनाना
७-दक्षयज्ञकी पूर्ति
८-ध्रुवका वन-गमन
९-ध्रुवका वर पाकर घर लौटना
१०-उत्तमका मारा जाना, ध्रुवका यक्षोंके साथ युद्ध
११-स्वायम्भुव-मनुका ध्रुवजीको युद्ध बंद करनेके लिये समझाना
१२-ध्रुवजीको कुबेरका वरदान और विष्णुलोककी प्राप्ति
१३-ध्रुववंशका वर्णन, राजा अंगका चरित्र
१४-राजा वेनकी कथा
१५-महाराज पृथुका आविर्भाव और राज्याभिषेक
१६-वंदीजनद्वारा महाराज पृथुकी स्तुति
१७-महाराज पृथुका पृथ्वीपर कुपित होना और पृथ्वीके द्वारा उनकी स्तुति करना
१८-पृथ्वी-दोहन
१९-महाराज पृथुके सौ अश्वमेध यज्ञ
२०-महाराज पृथुकी यज्ञशालामें श्रीविष्णुभगवान्का प्रादुर्भाव
२१-महाराज पृथुका अपनी प्रजाको उपदेश
२२-महाराज पृथुको सनकादिका उपदेश
२३-राजा पृथुकी तपस्या और परलोकगमन
२४-पृथुकी वंशपरम्परा और प्रचेताओंको भगवान् रुद्रका उपदेश
२५-पुरंजनोपाख्यानका प्रारम्भ
२६-राजा पुरंजनका शिकार खेलने वनमें जाना और रानीका कुपित होना
२७-पुरंजनपुरीपर चण्डवेगकी चढ़ाई तथा कालकन्याका चरित्र
२८-पुरंजनको स्त्रीयोनिकी प्राप्ति और अविज्ञातके उपदेशसे उसका मुक्त होना
२९-पुरंजनोपाख्यानका तात्पर्य
३०-प्रचेताओंको श्रीविष्णुभगवान्का वरदान
३१-प्रचेताओंको श्रीनारदजीका उपदेश और उनका परमपद-लाभ
पञ्चम स्कन्ध
१-प्रियव्रत-चरित्र
२-आग्नीध्र-चरित्र
३-राजा नाभिका चरित्र
४-ऋषभदेवजीका राज्यशासन
५-ऋषभजीका अपने पुत्रोंको उपदेश देना और स्वयं अवधूतवृत्ति ग्रहण करना
६-ऋषभदेवजीका देहत्याग
७-भरत-चरित्र
८- भरतजीका मृगके मोहमें फँसकर मृगयोनिमें जन्म लेना
९-भरतजीका ब्राह्मणकुलमें जन्म
१०-जडभरत और राजा रहूगणकी भेंट
११-राजा रहूगणको भरतजीका उपदेश
१२-रहूगणका प्रश्न और भरतजीका समाधान
१३-भवाटवीका वर्णन और रहूगणका संशयनाश
१४-भवाटवीका स्पष्टीकरण
१५-भरतके वंशका वर्णन
१६-भुवनकोशका वर्णन
१७-गंगाजीका विवरण और भगवान् शंकरकृत संकर्षणदेवकी स्तुति
१८-भिन्न-भिन्न वर्षोंका वर्णन
१९-किम्पुरुष और भारतवर्षका वर्णन
२०-अन्य छः द्वीपों तथा लोकालोक-पर्वतका वर्णन
२१-सूर्यके रथ और उसकी गतिका वर्णन
२२-भिन्न-भिन्न ग्रहोंकी स्थिति और गतिका वर्णन
२३-शिशुमारचक्रका वर्णन
२४-राहु आदिकी स्थिति, अतलादि नीचेके लोकोंका वर्णन
२५-श्रीसङ्कर्षणदेवका विवरण और स्तुति
२६-नरकोंकी विभिन्न गतियोंका वर्णन
षष्ठ स्कन्ध
१-अजामिलोपाख्यानका प्रारम्भ
२-विष्णुदूतोंद्वारा भागवतधर्म-निरूपण और अजामिलका परमधामगमन
३-यम और यमदूतोंका संवाद
४-दक्षके द्वारा भगवान्की स्तुति और भगवान्का प्रादुर्भाव
५-श्रीनारदजीके उपदेशसे दक्षपुत्रोंकी विरक्ति तथा नारदजीको दक्षका शाप
६-दक्षप्रजापतिकी साठ कन्याओंके वंशका विवरण
७-बृहस्पतिजीके द्वारा देवताओंका त्याग और विश्वरूपका देवगुरुके रूपमें वरण
८-नारायणकवचका उपदेश
९-विश्वरूपका वध, वृत्रासुरद्वारा देवताओंकी हार और भगवान्की प्रेरणासे देवताओंका दधीचि ऋषिके पास जाना
१०-देवताओंद्वारा दधीचि ऋषिकी अस्थियोंसे वज्रनिर्माण और वृत्रासुरकी सेनापर आक्रमण
११-वृत्रासुरकी वीरवाणी और भगवत्प्राप्ति
१२-वृत्रासुरका वध
१३-इन्द्रपर ब्रह्महत्याका आक्रमण
१४-वृत्रासुरका पूर्वचरित्र
१५-चित्रकेतुको अंगिरा और नारदजीका उपदेश
१६-चित्रकेतुका वैराग्य तथा संकर्षणदेवके दर्शन
१७-चित्रकेतुको पार्वतीजीका शाप
१८-अदिति और दितिकी सन्तानोंकी तथा मरुद्गणोंकी उत्पत्तिका वर्णन
१९-पुंसवन-व्रतकी विधि
सप्तम स्कन्ध
१-नारद-युधिष्ठिर-संवाद और जय-विजयकी कथा
२-हिरण्याक्षका वध होनेपर हिरण्यकशिपुका अपनी माता और कुटुम्बियोंको समझाना
३-हिरण्यकशिपुकी तपस्या और वरप्राप्ति
४-हिरण्यकशिपुके अत्याचार और प्रह्लादके गुणोंका वर्णन
५-हिरण्यकशिपुके द्वारा प्रह्लादजीके वधका प्रयत्न
६-प्रह्लादजीका असुर-बालकोंको उपदेश
७-प्रह्लादजीद्वारा माताके गर्भमें प्राप्त हुए नारदजीके उपदेशका वर्णन
८-नृसिंहभगवान्का प्रादुर्भाव, हिरण्यकशिपुका वध एवं ब्रह्मादि देवताओंद्वारा भगवान्की स्तुति
९-प्रह्लादजीके द्वारा नृसिंहभगवान्की स्तुति
१०-प्रह्लादजीके राज्याभिषेक और त्रिपुरदहनकी कथा
११-मानवधर्म, वर्णधर्म और स्त्रीधर्मका निरूपण
१२-ब्रह्मचर्य और वानप्रस्थआश्रमोंके नियम
१३-यतिधर्मका निरूपण और अवधूत-प्रह्लाद-संवाद
१४-गृहस्थसम्बन्धी सदाचार
१५-गृहस्थोंके लिये मोक्षधर्मका वर्णन
अष्टम स्कन्ध
१-मन्वन्तरोंका वर्णन
२-ग्राहके द्वारा गजेन्द्रका पकड़ा जाना
३-गजेन्द्रके द्वारा भगवान्की स्तुति और उसका संकटसे मुक्त होना
४-गज और ग्राहका पूर्वचरित्र तथा उनका उद्धार
५-देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाना और ब्रह्माकृत भगवान्की स्तुति
६-देवताओं और दैत्योंका मिलकर समुद्रमन्थनके लिये उद्योग करना
७-समुद्रमन्थनका आरम्भ और भगवान् शंकरका विषपान
८-समुद्रसे अमृतका प्रकट होना और भगवान्का मोहिनी-अवतार ग्रहण करना
९-मोहिनी-रूपसे भगवान्के द्वारा अमृत बाँटा जाना
१०-देवासुर-संग्राम
११-देवासुर-संग्रामकी समाप्ति
१२-मोहिनीरूपको देखकर महादेवजीका मोहित होना
१३-आगामी सात मन्वन्तरोंका वर्णन
१४-मनु आदिके पृथक् पृथक् कर्मोंका निरूपण
१५-राजा बलिकी स्वर्गपर विजय
१६-कश्यपजीके द्वारा अदितिको पयोव्रतका उपदेश
१७-भगवान्का प्रकट होकर अदितिको वर देना
१८-वामनभगवान्का प्रकट होकर राजा बलिकी यज्ञशालामें पधारना
१९-भगवान् वामनका बलिसे तीन पग पृथ्वी माँगना, बलिका वचन देना और शुक्राचार्यजीका उन्हें रोकना
२०-भगवान् वामनजीका विरारूप होकर दो ही पगसे पृथ्वी और स्वर्गको नाप लेना २१-बलिका बाँधा जाना
२२-बलिके द्वारा भगवान्की स्तुति और भगवान्का उसपर प्रसन्न होना
२३-बलिका बन्धनसे छूटकर सुतललोकको जाना
२४-भगवान्के मत्स्यावतारकी कथा